हिजाब पहनने को लेकर जारी विवाद के बीच आज कर्नाटक हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि हिजाब इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और स्कूल छात्रा यूनिफॉर्म पहनने से इनकार नहीं कर सकते. हाइकोर्ट ने मुस्लिम छात्राओं की ओर से कॉलेजों में हिजाब पहनने को लेकर इजाजत मांगने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया.

हाई कोर्ट के इस फैसले पर अब अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान सामने आया है. ओवैसी ने कहा है कि मैं हाई कोर्ट के इस फैसले से असहमत हूं. मुझे उम्मीद है कि याचिकाकर्ता अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे.

ओवैसी ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके कहा, ”मैं हिजाब पर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले से असहमत हूं. फैसले से असहमत होना मेरा अधिकार है और मुझे उम्मीद है कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील करेंगे.”

ओवैसी ने कहा, ”हेडस्कार्फ़ पर प्रतिबंध निश्चित रूप से धर्मनिष्ठ मुस्लिम महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने से रोकता है. इसका मतलब है कि एक धर्म को निशाना बनाया गया है और उसकी धार्मिक प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. मुझे उम्मीद है कि इस फैसले का इस्तेमाल हिजाब पहनने वाली महिलाओं के उत्पीड़न को वैध बनाने के लिए नहीं किया जाएगा.”

पीठ ने यह भी कहा कि सरकार के पास पांच फरवरी 2022 के सरकारी आदेश को जारी करने का अधिकार है और इसे अवैध ठहराने का कोई मामला नहीं बनता है. इस आदेश में राज्य सरकार ने उन वस्त्रों को पहनने पर रोक लगा दी थी शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू करने का अनुरोध करने वाली याचिका भी खारिज कर दी गई.

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