देवभूमि उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के ऐतिहासिक एक वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश से पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कोटि-कोटि साधुवाद एवं मंगलकामनाएँ दीं। उन्होंने इसे केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की संवैधानिक आत्मा, सांस्कृतिक समरसता और नैतिक दृढ़ता का जीवंत उद्घोष बताया।
स्वामी जी ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू कर उत्तराखंड ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ा है, जो स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने समान नागरिक संहिता को लागू कर संविधान के अनुच्छेद 44 के क्रियान्वयन की दिशा में ऐतिहासिक पहल की।
उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और प्रत्येक नागरिक की गरिमा सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम है। यह संविधान की उस मूल भावना को साकार करती है, जिसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार और संरक्षण की परिकल्पना की गई है। जब कानून करुणा, समता और संवेदनशीलता से जुड़ता है, तभी वह समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
स्वामी ने यह भी कहा कि देवभूमि उत्तराखंड से उठी यह प्रेरणा केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की अवधारणा को सशक्त बनाती है। समान नागरिक संहिता का एक वर्ष पूर्ण होना इस बात का प्रमाण है कि साहसिक नेतृत्व, स्पष्ट दृष्टि और जन-विश्वास के साथ लिए गए निर्णय समाज को विभाजित नहीं, बल्कि समावेशित करते हैं।उन्होंने भारत की सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना तभी साकार होती है, जब समाज में किसी के साथ भेदभाव न हो और सभी को समान न्याय मिले। समान नागरिक संहिता इसी भावना को आधुनिक विधिक ढांचे में प्रतिष्ठित करती है, जहाँ व्यक्ति की गरिमा सर्वोपरि है।