छत्रपति संभाजीनगर: देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत ने भले ही बेहतरीन कानूनी दिमाग तैयार किए हों, लेकिन हमारी कानूनी शिक्षा प्रणाली में अब भी कई बड़ी खामियां हैं, जो 21वीं सदी की जरूरतों को पूरा करने में रुकावट बन रही हैं।

डिजिटल कानून जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं- सीजेआई
शनिवार को यहां ‘विष्णुपंत अद्वंत व्याख्यानमाला’ में ‘कानूनी पेशे का वर्तमान और भविष्य: अवसर, चुनौतियां और कमियां’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज डिजिटल युग में डेटा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से जुड़े मामले, ऑनलाइन विवाद निपटान और डिजिटल कानून जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में कानूनी शिक्षा को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर डिजिटल कानून, डेटा प्राइवेसी, पर्यावरण कानून और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों को भी शामिल करना होगा।

कानून के छात्रों और वकीलों को पूर्व सीजेआई की सलाह

पूर्व सीजेआई ने बताया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई तकनीकी सुधार किए, जैसे लगभग सभी राज्यों में ई-फाइलिंग की सुविधा, डिजिटल केस रिकॉर्ड और पेपरलेस कोर्ट की व्यवस्था। कानून के छात्रों और वकीलों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा-

  • अपमानजनक टिप्पणियों को नजरअंदाज करें, इससे केस नहीं जीता जाता।
  • वकील सबसे पहले न्याय के सहायकहों, न कि केवल बहस जीतने वाले।
  • कानून और तथ्यों की गहरी समझ रखें, पुरानी मिसालों में केस को जबरदस्ती फिट न करें।
  • गुस्सा कोर्ट के बाहर छोड़ें, गरिमा और शालीनता बनाए रखें।
  • सहयोगियों के साथ अच्छा व्यवहार रखें, क्योंकि यही आपकी पहचान बनाता है।
  • दिखावे से ज्यादा कौशल और तर्क पर ध्यान दें।

तनावभरा पेशा है वकालत- पूर्व सीजेआई
उन्होंने कहा कि वकालत तनावभरा पेशा है और इसमें मानसिक स्वास्थ्य की समस्या, अवसाद और नशे की लत का खतरा अधिक होता है। ऐसे में वकीलों को एक-दूसरे का हालचाल पूछना और मदद करना जरूरी है। आखिरी में उन्होंने कहा कि कानून के छात्रों को लगातार खुद को अपडेट करते रहना चाहिए और इस क्षेत्र में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए।