नहाय खाय के साथ आज शुक्रवार से छठ महापर्व की शुरुआत हो गई है।चार दिवसीय महापर्व के लिए नदी के घाटों पर साफ-सफाई हो चुकी है। साथ ही छठ मैया की स्थापना कर दी गई है।36 घंटे तक चलने वाला ये निर्जला उपवास सबसे  कठीन माना गया है.

छठ पूजा में संतान के स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु के लिए रखा जाता है. ये ऐसा व्रत है जिसे महिला और पुरुष दोनों ही रखते हैं. इसके बाद छठ पूजा संपन्न होगी और व्रती लोग अपना व्रत खोलेंगे।

इस महापर्व की तैयारी के मद्देनजर राजधानी देहरादून में पाटलिपुत्र विचार मंच के सदस्यों अशोक पंडित, गौतम पंडित, अनिल प्रजापति, मुकेश यादव, संजय कुमार झा, शैलेंद्र प्रजापति, संदीप प्रजापति, अनिल सिंह ने रायपुर, मालदेवता, नत्थनपुर, हरबंस वाला और डालनवाला में छठ पूजा के लिए घाटों पर साफ-सफाई का काम किया। इन घाटों पर छठ मैया की स्थापना की गई।

छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक माह के चतुर्थी तिथि को पहले दिन नहाय खाय,  दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसके बाद व्रत का पारण यानी समापन होता है.

छठ पूजा कलेंडर
पहला दिन- नहाय खाय (28 अक्टूबर 2022, शुक्रवार)
दूसरा दिन- खरना (29 अक्टूबर 2022, शनिवार)
तीसरा दिन- अस्तचलगामी सूर्य को अर्घ्य (30 अक्टूबर 2022, रविवार)
आखिरी दिन व चौथे दिन- उदीयमान सूर्य को अर्घ्य (31 अक्टूबर 2022, सोमवार)

छठ पूजा के नियम 
छठ पूजा के नियम पूरे चार दिनों तक चलते हैं. जोकि इस प्रकार से है.

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