पा ने हर स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी उत्पीड़न की घटनाओं पर सरकार को जोरदार तरीके से घेरने की रणनीति बनाई हैं  उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर अपना अभियान तेज कर दिया है। निकाय पालिका परिषद और नगर पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए अखिलेश ने उसके क्षेत्र के विधायकों को नामित कर दिया है।

इसके अलावा जहां विधायक नहीं हैं, वहां विधानसभा चुनाव लड़ चुके पार्टी प्रत्याशियों को पर्यवेक्षक बनाया गया है।विधान सभा चुनाव में पार्टी का वोटबैंक 30 फीसदी से ऊपर पहुंचने से उत्साहित रणनीतिकार इसे सहेजे रखने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

सदस्यता अभियान चलाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को प्रभारी के तौर पर जिम्मेदारी दी गई है। ये प्रभारी ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाने के साथ ही क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले नेताओं को चिह्नित भी कर रहे हैं।पर्यवेक्षकों से कहा गया है कि वोटर लिस्ट में नाम बढ़वाने, कटवाने, बदलवाने का काम पार्टी हित में कराएंगे।

भाजपा सरकार को घेरने में सक्रिय रहने वाले नेताओं पर शीर्ष नेतृत्व नजर भी रख रहा है।पार्टी ने तय किया है कि कहीं भी उत्पीड़न की घटना सामने आती है तो पार्टी का प्रतिनिधिमंडल मौके पर जांच कर रिपोर्ट तैयार करेगा।

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