नई दिल्ली:लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर आरोपों पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने जमकर पलटवार किया। उन्होंने बुधवार को कहा, ‘कल कुछ कांग्रेस के लोग कह रहे थे कि राहुल गांधी और विपक्ष के नेताओं ने बवंडर खड़ा किया। बवंडर नहीं, ब्लंडर है। जितने आरोप आज तक लगाए, मैं राहुल जी को यही कहूंगा कि धूल चेहरे पर थी और आप आईना साफ करते रहे।’

अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘अगर किसी के नेतृत्व में 90 बार चुनाव हारने का रिकॉर्ड है, तो वह राहुल गांधी के नेतृत्व में है। पार्टी के अंदर भी राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठते हैं। जब वह चुनाव हारते हैं, तो ईवीएम पर सवाल उठाते हैं या मतदाताओं को दोषी ठहराते हैं। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा के लिए ईवीएम में हेराफेरी की गई है। फिर उन्होंने कहा कि ईवीएम पर प्रतिबंध लगाओ, मतपत्र वापस लाओ। फिर उन्होंने कहा कि ईवीएम को रिमोट से हैक किया जा सकता है। हर हार के बाद कांग्रेस नए बहाने ढूंढती रही। कांग्रेस ने आत्मचिंतन नहीं किया, बल्कि बार-बार ईवीएम, चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को दोष देती रही। बिहार चुनाव हारते देख कांग्रेस पहले ही विपक्षी दलों के साथ मिलकर झूठे आरोप लगाने में जुट गई है।’

‘संविधान निर्माता को कांग्रेस परिवार ने चुनावी धोखाधड़ी के जरिए हराया’
अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘अगर हम 1952 से शुरुआत करें तो कांग्रेस और सीपीआई ने मिलकर संविधान निर्माता और संत समान नेता डॉ. भीमराव अंबेडकर को चुनाव में हराया था। कांग्रेस ने 1952 के पहले ही चुनाव में चुनावी भ्रष्टाचार की नींव रखी थी। रिकॉर्ड देखें- 74,333 वोट खारिज हुए, जबकि अंबेडकर जी सिर्फ 14,561 वोटों से हारे। कांग्रेस ने यह सुनिश्चित किया कि एक संविधान निर्माता, एक दलित नेता, पहले ही चुनाव में चुनाव हार जाए। सोचिए, जिसने संविधान बनाया, उसे कांग्रेस परिवार ने चुनावी धोखाधड़ी के जरिए हरा दिया।’

राहुल को पुराना इतिहास याद दिलाया
उन्होंने कहा, ‘इस परिवार और पार्टी में शुरू से ही एक परंपरा रही है कि अगर आप चुनाव हार जाते हैं, तो आप चुनाव आयोग, मतदाताओं या चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं। इंदिरा गांधी ने कहा था कि मतदाता मूर्खों का समूह हैं। जब राजीव गांधी चुनाव हार गए, तो उन्होंने बैलेट पेपर को दोष दिया। राहुल गांधी के पिता कहते थे कि वोटिंग मशीनों से चुनाव कराओ और राहुल गांधी कहते हैं कि बैलेट पेपर से चुनाव कराओ।’