Monday, April 22, 2024 at 7:11 PM

लालू ने खेल दिया हिंदू कार्ड, पीएम मोदी को हिंदू मानने से किया इनकार; राजद अध्यक्ष ने उदाहरण भी बताए

भारतीय जनता पार्टी अबतक हिंदू कार्ड खेलने के लिए जानी जाती रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सनातन धर्म का संरक्षक बताती रही है। लेकिन, राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने दोनों मोर्चों पर अब लड़ाई छेड़ दी है। रविवार को पटना के गांधी मैदान में महागठबंधन की जन विश्वास महारैली को संबोधित करते हुए लालू ने कहा कि पीएम मोदी तो हिंदू ही नहीं हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई हिंदू यह-यह काम नहीं कर सकता, जो पीएम मोदी ने किया है। उन्होंने पीएम मोदी की पारिवारिक जिंदगी पर भी हमला बोला। शनिवार को पीएम मोदी बिहार में आए थे तो उन्होंने बिना नाम लिए परिवारवाद के बहाने लालू प्रसाद पर हमला बोला था।

लालू प्रसाद ने पीएम मोदी पर व्यक्तिगत निशाना साधा
लालू प्रसाद ने कहा कि “मंडल कमीशन का नतीजा है कि आज हर पिछड़ा वर्ग, दलित, वंचित और गरीब सत्ता के दरवाजे पर खड़ा है। यह नरेंद्र मोदी क्या चीज है? यह मोदी आजकल परिवारवाद पर हमला कर रहे हैं। आप बताओ न, आपको क्यों नहीं संतान हुआ? ज्यादा संतान होने वाले लोगों को बोलता है कि परिवारवाद है। परिवार के लिए लड़ रहा है। आपके पास परिवार नहीं है और आप हिन्दू भी नहीं हैं। जब आपकी माताजी का देहावसान हो गया तो हर हिन्दू अपनी मां के शोक में केस दाढ़ी मुंडवाता है। आपने क्यों नहीं छिलवाया? यह बताओ।”

लालू ने पीएम मोदी को गैर-हिंदू और नफरती बोला
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पीएम पर हमला कायम रखा। बोले- “देश भर नफरत फैला रहे हो। कहता है कि भगवान में प्राण प्रतिष्ठा कर दिया। बताओ कि बिना प्राण प्रतिष्ठा के ही भगवान ही अब तक थे?” उन्होंने पीएम मोदी को हिंदू मानने से इनकार करते हुए अपनी बातें पूरी कीं तो राम-सीता होते हुए बेटी-बेटा तक पहुंचे। उन्होंने कहा- “जनकपुर में श्रीराम चंद्र जी की शादी हुई।

बिहार जैसे राज्य में एक से एक सूरमा पैदा लिए। इसी गांधी मैदान में न जाने कितनी बार देश भर नेताओं का सभाएं हुईं। यहीं से देश भर संदेश गया। बिहार के हवा में इतना दम हैं कि जो देश के लोग इसका अनुकरण करते हैं। मेरा किडनी का ट्रांसप्लांट हुआ है। हमारी बेटी रोहिणी ने अपनी किडनी मुझे दान दी। मुझे जीवनदान दिया। तेजस्वी यादव काफी मेहनत कर रहे हैं। लोगों को इतनी नौकरी दी। हम रोज पूछते थे- आज कितनी नौकरी दी? सिपाही में कितनी नौकरी दी? फिर यह भी कहा कि आरक्षण जोड़ लो, जब सिपाही को नौकरी दो।”

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