जर्मनी सरकार के अमेरिका से एफ-35 लड़ाकू विमान खरीदने के फैसले से देश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ देसी रक्षा उद्योग ने कमर कस ली है।  इस निर्णय से अमेरिका पर जर्मनी की निर्भरता और बढ़ेगी और इससे सामरिक मामलों में जर्मनी की स्वायत्ता से समझौता होगा।जर्मन रक्षा उद्योग ने यह भी कहा है कि इस फैसले से उसे मिल सकने वाला मुनाफा अमेरिकी कंपनी की जेब में चला जाएगा।

 वक्ताओं ने आरोप लगाया कि चांसलर ओलोफ शोल्ज की सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाए, जिसकी कीमत आम जर्मन नागरिकों को चुकानी पड़ रही है।  शोल्ज ने इसी महीने चीन की यात्रा भी की।

एफ-35 लड़ाकू विमानों की खरीद का मुद्दा गरमाया है।  जर्मन पत्रिका वर्ट्सशैफ्ट के हवाले से बताया है कि जर्मनी की कई रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने खुल कर शोल्ज सरकार की आलोचना की है। इससे जर्मनी की सामरिक स्वायत्तता की बलि चढ़ेगी और देश की अमेरिका पर निर्भरता बढ़ेगी।

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