उत्तराखंड विधानसभा ने बुधवार को कड़े प्रावधानों वाला धर्मांतरण रोधी संशोधन विधेयक पारित कर दिया,  जबरन धर्म परिवर्तन के दोषियों के लिए तीन साल से लेकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है.

प्रदेश के धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने इसे पेश करते हुए कहा था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27 और 28 के अनुसार, प्रत्येक धर्म को समान रूप से प्रबल करने के उद्देश्य में आ रहीं कठिनाइयों के निराकरण के लिए यह संशोधन विधेयक लाया गया है.

विधेयक में विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाते हुए दोषियों के लिए न्यूनतम तीन साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक के कारावास का प्रावधान है.इस संशोधन के बाद अपराध करने वाले को कम से कम पांच लाख रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान भी करना भी पड़ सकता है, जो पीड़ित को दी जाएगी.

कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बल, प्रलोभन या कपटपूर्ण साधन द्वारा एक धर्म से दूसरे में परिवर्तित या परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा.उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2022 पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट किया, ‘इसके तहत धर्म परिवर्तन पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है.

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