पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने लोकसभा में जानकारी दी कि देश में बंदरों के काटने से घायल हुए लोगों की संख्या का कोई रिकॉर्ड नहीं है।  मामलों पर संसद में चिंता जताई और लोकसभा में सरकार से सवाल पूछा था और सांसद चाहर ने बंदरों से प्रभावित लोगों को अनुग्रह राशि की राशि पर स्पष्टीकरण मांगा।

मंत्रालय ने कहा कि पत्र में यह स्पष्ट किया गया था कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत देय अनुग्रह राहत की प्रतिपूर्ति धन की उपलब्धता के अधीन बढ़ी हुई दरों के अनुसार राज्यों द्वारा की जा सकती है।

लोकसभा को पहले सूचित किया गया था कि 2015 में बंदर के काटने के 1,900 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 400 से अधिक मामलों की वृद्धि थी। राष्ट्रीय राजधानी में 2015 में हर दिन बंदर के काटने के कम से कम पांच मामले सामने आए।

सरकार ने सोमवार को अपने जवाब में कहा कि इस तरह के हमलों के पीड़ितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को भी बढ़ाया गया है, यह स्पष्ट करते हुए कि देय अनुग्रह राशि की प्रतिपूर्ति राज्यों के पास उपलब्ध धन के आधार पर की जाएगी।

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