ऐसा संयोग सैकड़ों वर्षों में ही कभी-कभी आता है।  पूर्व यह लगभग 255 वर्ष पहले बना था।ज्योतिषाचार्यों का दावा है कि सोमवती अमावस्या पर पड़ रहे परिघ और शिव योग के विशेष संयोग में स्नान करने से बेहद ही पुण्य लाभ मिलेगा। मान्यता है कि परिघ योग शत्रुओं पर विजय दिलाता है।

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। यह वर्ष में केवल एक अथवा दो बार ही पड़ती है। सुबह 03:57 बजे से लेकर यह 11:03 बजे तक है। इसके बाद से पूरे दिन शिव योग रहेगा।

मान्यता है कि इसी योग में रावण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके भोलेनाथ को प्रसन्न किया था। तब भगवान आशुतोष ने प्रसन्न होकर रावण को त्रिलोक विजेता होने का वरदान और आशीर्वाद दिया था। इस स्तोत्र में रावण ने 17 श्लोंको से भगवान शिव की स्तुति गाई है। शिव योग में ही रावण द्वारा शिव तांडव स्त्रोत की रचना करने का भी प्रमाण मिलता है।

ज्योतिषाचार्य विजेंद्र दत्त का कहना है कि हालांकि इस बार सोमवती अमावस्या परिघ और शिव योग का विशेष संयोग होने के साथ पूरे दिन पंचक भी हैं। उनका मानना है कि पंचकों में कुछ कार्य को करना वर्जित माना जाता है। स्नान आदि से निवृत्त होकर सूर्य भगवान अर्घ्य देने पर भास्कर भगवान की कृपा बरसेगी।

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