Thursday, February 9, 2023 at 3:16 PM

 40 की आयु के बाद पुरुषों को अपने स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को लेकर रहना चाहिए सतर्क

जब स्वास्थ्य की बात आती है तो बात पुरुष, महिला व बच्चों में बांटनी कई बार महत्वपूर्ण हो जाती है। कई बार रोग व उनसे जुड़े ऐहतियात और दवाएं आयु व जेंडर के चलते भिन्न-भिन्न होते हैं। आइए आज हम पुरुषों के स्वास्थ्य की बात करें। 40 की आयु के बाद पुरुषों को अपने स्वास्थ्य व शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए। नियमित डायबिटीज टेस्ट से लेकर बीपी स्क्रीनिंग के अतिरिक्त प्रोस्टेट संबंधी विकारों को भी लेकर सजग हो जाना चाहिए।


पुरुष मूत्राशय के पास स्थित एक ग्रन्थि है
एक आयु के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा बहुत ज़्यादा होता है। प्रोस्टेट दरअसल, पुरुष मूत्राशय के पास स्थित एक ग्रन्थि है। यदि इसमें कैंसर हो जाए तो यह शरीर के दूसरे भागों में भी फैल सकता है। वैसे तो यह आमतौर पर 50 साल से अधिक आयु के पुरुषों को होता है लेकिन देखा गया है कि अब यह 40 से कम आयु के व्यक्तियों को भी होने लगा है। इसलिए बेहतर है कि इसे लेकर सतर्क हो जाएं। माना गया है कि कम वसा-युक्त खाद्य पदार्थ खाने से इसके प्रीवेंशन में मदद मिलती है। रेड मीट व अल्कोहल के सेवन को भी कम कर दें तो बेहतर होगा।

पीएसए टेस्ट प्रोस्टेट कैंसर के बारे में बताता है
माई इलाज वेबसाइट के मुताबिक, पीएसए टेस्ट प्रोस्टेट कैंसर के बारे में बताता है। वैसे यह टेस्ट न सिर्फ कैंसर के बारे में बताता है बल्कि यह प्रोस्टेट से संबंधित किसी अन्य परेशानी के बारे में भी हिंट देता है। पीएसए का बढ़ना इस रोग की दिशा में इशारा होने कि सम्भावना है। पुरुषों के शरीर में प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजेन (खून में प्रोस्टेट हैल्थ का पता लगाने वाला सूचक) के स्तर को मापने के लिए पीएसए टेस्ट किया जाता है। प्रोस्टेट की जाँच के लिए हर वर्ष ऐंटीजेन ब्लड टेस्ट व 35 साल की आयु के बाद डिजिटल रेक्टल जाँच करवाने की सलाह भी दी जाती है।

टेस्टोस्टेरोन शरीर का हॉर्मोन हैजानकार बताते हैं कि यदि पीएसए लेवल सामान्‍य स्‍तर से थोड़ा सा ही ज्‍यादा है तो खान पान व जीवनशैली में कुछ उचित परिवर्तन कर आप इसे कंट्रोल कर सकते हैं। टेस्टोस्टेरोन शरीर का हॉर्मोन है। इसकी कमी की जाँच के लिए खून या लार की जाँच होने की वजह से पुरुषों में स्तंभन गुनाह के अतिरिक्त थकान व वजन के बढ़ने की दिक्कतें देखी गई हैं। हड्डियों व मसल्स को नुकसान, बालों का कम होना, नींद में कमी आने के अतिरिक्त व्यक्तित्व में परिवर्तन भी आ सकते हैं।
 

एचआईवी व एड्स को लेकर पुरुषों को सतर्क होना जरूरी
एड्स को लेकर भले ही जागरूकता फैलाने में सरकारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है लेकिन फिर भी जब बात अपने पर आती है तब हम कई बार इस पर ध्यान नहीं देते। एचआईवी व एड्स को लेकर पुरुषों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें यह संक्रमण हुआ है। बता दें कि इसके शुरूआती लक्षण सर्दी, जुकाम व बुखार भी हैं। समय समय पर एचआईवी की जाँच करवाना ऐहतियातन महत्वपूर्ण है।

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