Saturday, December 10, 2022 at 12:09 AM

2019 का रास्ता बीजेपी के लिए कितना कठिन भरा…

हालिया सियासी उठापटक बता रही है कि 2019 आम चुनाव में बीजेपी के लिए दशा कितने विकट रहने वाले हैं. बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का कुनबा लगातार सिमटता जा रहा है. कुछ बड़े दल बीजेपी से अलग हो चुके हैं  कुछ दल बीजेपी से बेहद नाराज हैं. इसका सीधा प्रभाव 2019 के आम चुनाव में पड़ सकता है. बिहार में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी  यूपी में सुहेलदेव हिंदुस्तान समाज पार्टी की बीजेपी से नाराजगी ने मुश्किलों में  इजाफा किया है.
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2019 का संग्राम 

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद 2019 का संग्राम प्रारम्भ हो जाएगा. विधानसभा चुनावों के परिणाम 2019 का सियासी मूड सेट करेंगे. खास तौर पर मध्य प्रदेश, राजस्थान छत्तीसगढ़ चुनाव के नतीजे बताएंगे कि आम चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए की सत्ता वापसी की कितनी आसार बनती है. जिस तरह से बीजेपी के सहयोगी उसका साथ लगातार छोड़ रहे हैं, उससे तो फिल्हाल पार्टी के सामने कठिन खड़ी हो गई है.

बिहार-यूपी की उठापटक

बिहार  उत्तर प्रदेश की उठापटक बता रही है कि बीजेपी के लिए दशा कितने विकट हैं. बिहार में उपेंद्र कुशवाह की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोक समता पार्टी  यूपी में ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव हिंदुस्तान समाज पार्टी के रुख ने बीजेपी के लिए कठिनाई खड़ी कर दी है. हालांकि, दोनों दल छोटे हैं लेकिन इसके मायने गहरे हैं. दोनों ने अभी तक एनडीए से अलग होने का एलान तो नहीं किया है लेकिन इनकी नाराजगी साफ देखी जा सकती है. अगर बीजेपी इन्हें मनाने में नाकाम रहती है तो लोकसभा चुनाव में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बड़े दल हुए नाराज  

एनडीए में करीब 40 पार्टियां हैं लेकिन अधिकांश छोटी पार्टियां हैं. इनमें से करीब 14 पार्टियों के पास ही सांसदों की अच्छी संख्या हैं. बीजेपी की एक जरूरी सहयोगी रही तेलुगुदेशम पार्टी पहले ही एनडीए से अलग हो चुकी है. चंद्रबाबू नायडू तीसरा मोर्चा बनाने की जुगत में लगे हैं. बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना भी उससे बेहद नाराज है  अलग लड़ने का इशारा दे चुकी है. हालांकि महाराष्ट्र में अब भी दोनों दल मिलकर गवर्नमेंट चला रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी पर शिवसेना के आए दिन होने वाले सियासी हमले बता रहे हैं कि इनके संबंधकिस दौर में पहुंचे चुके हैं.

उत्तर प्रदेश में अग्निपरीक्षा

2019 में बीजेपी को यूपी में सबसे बड़ी लड़ाई लड़नी है. यहां अगर सपा-बसपा साझेदारी आकार लेता है तो उसके लिए 2014 का करिश्मा दोहराना असंभव होगा. 2014 में उत्तर प्रदेश ने ही बीजेपी की गवर्नमेंट बनाने में सबसे बड़ी किरदार निभाई थी. उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में एकजुट विपक्ष ने बीजेपी को जबरदस्त पराजय का स्वाद चखाया था. बीजेपीमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  डिप्टी मुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य की सीट ही गंवा बैठी. 2019 में बीजेपी के लिए यह राज्य अग्निपरीक्षा वाला साबित होगा. अगर यहां सपा-बसपा का साझेदारी होता है तो बीजेपी के लिए यह सबसे बुरी समाचार होगी.

बड़े राज्यों में बड़ी मुश्किलें  

हालांकि, बिहार को लेकर बीजेपी आश्वस्त हो सकती है क्योंकि नीतीश कुमार दोबारा एनडीए में लौट आए हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी  आरएलडी की चुनौती बनी रहेगी. टीडीपी के अलग होने से आंध्र प्रदेश में बीजेपी की संभावनाओं गहरा झटका लगा है. जम्मू व कश्मीर में पीडीपी से संबंध भी समाप्त हो चुके हैं. महाराष्ट्र में अगर शिवसेना अलग हो जाती है तो बीजेपी को बड़ा नुकसान होना तय है. कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस साझेदारी बीजेपी को गंभीर नुकसान पहुंचा ही चुका है. तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में उसे अपने दम पर ही आगे का रास्ता तय करना है. उस पर अगर महागठबंधन की कवायद आकार लेती है तो बीजेपी के लिए 2019 की लड़ाई बेहद कठिन साबित होगी. कुल मिलाकर पांच राज्यों में चुनावों के नतीजे ही 2019 की दिशा और हालात तय करेंगे.

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