Wednesday, December 7, 2022 at 8:02 AM

लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि आज

राष्ट्र के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक की आज पुण्यतिथि है पंजाब के शेर  ब्रिटिश शासन के विरूद्ध लड़ने वाले आज ही के दिन 1928 में निधन हो गया था को पंजाब केसरी के नाम से भी जाना जाता है वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज में वो बुरी तरह घायल हुए  17 नवंबर वर्ष 1928 में उनका निधन हो गया

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कहां हुआ जन्म
का जन्म 28 जनवरी 1865 को फिरोजपुर पंजाब में हुआ था उनके पिता मुंशी राधा कृष्ण आजाद फारसी  उर्दू के महान विद्वान थे उनकी माता गुलाब देवी धार्मीक प्रवृत्ति की महिला थीं 1884 में उनके पिता का रोहतक ट्रांसफर हो गया  वो भी पिता के साथ रहने के लिए आ गए 1877 में राधा देवी से उनकी विवाह हुई

शिक्षा-दीक्षा
उनके पिता राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रेवाड़ी में शिक्षक थे वहीं से उन्होंने प्राथमिक एजुकेशन हासिल की लॉ की पढ़ाई के लिए उन्होंने 1880 में लाहौर स्थित सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया 1886 में उनका परिवार हिसार शिफ्ट हो गया जहां उन्होंने लॉ की प्रैक्टिस की 1888  1889 के नैशनल कांग्रेस पार्टी के वार्षिक सत्रों के दौरान उन्होंने प्रतिनिधि के तौर पर भाग लिया न्यायालय में वकालत करने के लिए 1892 में वह लाहौर चले गए वर्ष 1885 में उन्होंने सरकारी कॉलेज से द्वितीय श्रेणी में वकालत की इम्तिहानउत्तीर्ण की  हिसार में अपनी वकालत प्रारम्भ कर दी वकालत के अतिरिक्त लालाजी ने दयानन्द कॉलेज के लिए धन एकत्र किया, आर्य समाज के कार्यों  कांग्रेस पार्टी की गतिविधियों में भाग लिया वह हिसार नगर पालिका के सदस्य  सचिव चुने गए वह 1892 में लाहौर चले गए

लाल-बाल-पाल के तिकड़ी का हिस्सा
इंडियन राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के तीन प्रमुख नेताओं में से एक थे लाल-बाल-पाल इस तिकड़ी का भाग थे बाल गंगाधर तिलक  बिपिन चंद्र पाल इस तिकड़ी के दूरसे दो सदस्य थेउन्होंने इंडियन राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में नरम दल (जिसका नेतृत्व पहले गोपाल कृष्ण गोखले ने किया) का विरोध करने के लिए गरम दल का गठन किया लाल, बाल, पाल यानी लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक  बिपिन चंद्र पाल गरम दल के 3 स्तंभ थे इनका मानना था कि आजादी याचना से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए प्रयत्न करना पड़ता हैलालाजी ने बंगाल के विभाजन के विरूद्ध हो रहे आंदोलन में भी भाग लिया उन्होंने सुरेंद्र नाथ बैनर्जी बिपिन चंद्र पाल  अरविन्द घोष के साथ मिलकर स्वदेशी के सशक्त अभियान के लिए बंगाल  राष्ट्र के दूसरे हिस्से में लोगों को एकजुट किया

आजादी के लिए छोड़ी वकालत
लाजपत राय ने वकालत करना छोड़ दिया  राष्ट्र को आजाद कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी उन्होंने यह महसूस किया कि संसार के सामने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों को रखना होगा ताकि हिंदुस्तान के स्वतंत्रता संग्राम में अन्य राष्ट्रों का भी योगदान मिल सके इस सिलसिले में वह 1914 में ब्रिटेन गए  फिर 1917 में यूएसए गए अक्टूबर, 1917 में उन्होंने न्यू यॉर्क में भारतीय होम रूल लीग की स्थापना की वह 1917 से 1920 तक अमेरिका में रहे

चौरी-चौरा के बाद बनाई कांग्रेस पार्टी इंडिपेंडेंस पार्टी
1920 में जब अमेरिका से लौटे तो लाजपत राय को कोलकाता में कांग्रेस पार्टी के खास सत्र की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरूद्ध उन्होंने पंजाब में ब्रिटिश शासन के विरूद्ध उग्र आंदोलन किया जब गांधीजी ने 1920 में असहयोग आंदोलन छेड़ा तो उन्होंने पंजाब में आंदोलन का नेतृत्व किया जब गांधीजी ने चौरी चौरा घटना के बाद आंदोलन को वापस लेने का निर्णय किया तो उन्होंने इस निर्णय का विरोध किया इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी इंडिपेंडेंस पार्टी बनाई

लाठीचार्ज में हुए थे घायल
साइमन कमिशन में कोई इंडियन प्रतिनिधि नहीं होने के कारण इंडियन नागरिकों का गुस्सा भड़क गया राष्ट्र भर में विरोध-प्रदर्शन होने लगा  विरोध प्रदर्शन में आगे-आगे थे 30 अक्टूबर, 1928 की घटना है लाजपत राय लाहौर में साइमन कमिशन के आने का विरोध करने के लिए एक शांतिपूर्ण जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे पुलिस अधीक्षक जेम्स ए स्कॉट ने मार्च को रोकने के लिए लाठीचार्ज का आदेश दे दिया पुलिस ने खासतौर पर लाजपत राय को निशाना बनाया  उसकी छाती पर मारा इस घटना के बाद बुरी तरह जख्मी हो गए 17 नवंबर, 1928 को हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया

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