Wednesday, December 7, 2022 at 8:56 AM

यूपी: सपा-बसपा का गठबंधन फाइनल, सीट बंटवारें को लेकर बना ये समीकरण

Lucknow. आगामी लोकसभा चुनावों में बीजेपी को घेरने के लिए यूपी में SP-BSP का गठबंधन फाइनल हो गया है. सूत्रों के मुताबिक सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से सबसे सबसे ज्‍यादा सीटों पर BSP मैदान में होगी. फॉर्मूले के तहत BSP-37 और SP-36 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इस महागठबंधन में कई छोटे दलों को भी शामिल किया गया है. इसके तहत रालोद-3, एसBSP-1, निषाद पार्टी-1 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. इस प्रकार यह महागठबंधन कुल मिलाकर 78 सीटों पर अपने प्रत्‍याशी उतारेगा.

महागठबंधन

सूत्रों के मुताबिक अमेठी और रायबरेली सीट पर महागठबंधन अपने प्रत्‍याशियों को नहीं उतारेगा. अमेठी और रायबरेली से कांग्रेस नेता क्रमश: राहुल गांधी और सोनिया गांधी लोकसभा सदस्‍य हैं. इस प्रकार साफ हो गया है कि ये सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई हैं लेकिन कांग्रेस इस महागठबंधन का हिस्‍सा नहीं होगी.

गठबंधन का गणित

1. यूपी में बीजेपी की सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी विपक्षी गठबंधन में बातचीत कर रहे हैं, सूत्रों के मुताबिक SP-BSP यूपी में 1 सीट SBSP को देंगी. देवरिया ज़िले की सलेमपुर लोकसभा सीट SBSP को जा सकती है.

2. गोरखपुर फूलपुर उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने निषाद पार्टी के साथ गठबंधन किया था और निषाद पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण निषाद को SP ने अपना प्रत्याशी बनाया था, जिसके बाद SP ने योगी के गृह जनपद में बीजेपी को हराया. SP-BSP 2019 के चुनाव में निषाद पार्टी को भी 1 सीट देगी. बनारस से सटी भदोही सीट निषाद पार्टी को जा सकती है.

3. SP-BSP गठबंधन 1 सीट यूपी की जनवादी पार्टी को देगी. संजय चौहान की जनवादी पार्टी के पूर्वांचल के कई ज़िलों में चौहान वोट बैंक में ख़ास असर है. लेकिन इस दल का प्रत्‍याशी SP के चुनाव चिन्‍ह पर मैदान में उतरेगा. इस तरह SP की 36 सीटों में ही इसको एडजस्‍ट किया जाएगा.

4. कैराना लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और RLD ने गठबंधन किया और SP की तबस्सुम बेगम को आरएलडी ने अपने सिंबल पर टिकट दिया. ये सीट RLD जीत गई, इस बार SP-BSP गठबंधन RLD को लोकसभा की 3 सीटें दे सकती है. मुज़फ्फरनगर, बागपत और अमरोहा सीटें आरएलडी के कोटे में जा सकती है. मुज़फ्फरनगर से चौधरी अजित सिंह चुनाव लड़ सकते हैं.

5. BSP 37 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी….पश्चिमी यूपी की अधिकतर सीटें BSP के पास जा सकती हैं. BSP अध्यक्ष मायावती भी इस बार लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं. क्योंकि इस वक्त मायावती किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं. सहारनपुर हिंसा के बाद मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे दिया था. सूत्रों के मुताबिक BSP अपने कोटे की सीटों के प्रत्याशियों को तैयारी के लिए भी कह चुकी है.

6. SP 36 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, मध्य यूपी और पूर्वांचल की अधिकतर सीटें SP के पास जाएंगी. अखिलेश यादव कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे और इस बार डिंपल यादव लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगी. मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे.

7. कांग्रेस को यूपी में SP-BSP इसलिए साथ नहीं ले रहे हैं क्योंकि कांग्रेस, राहुल गांधी को पहले ही पीएम उम्मीदवार के तौर पर कई जगह पेश कर चुकी है. राहुल गांधी पीएम चेहरे के तौर पर अखिलेश-मायावती को क़ुबूल नहीं हैं. इसके अलावा कांग्रेस ने हाल ही के राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में SP-BSP को गठबंधन के तहत सीटें नहीं दी, जिसकी वजह से SP-BSP कांग्रेस से नाराज़ हो गईं.

8. सिर्फ इतना ही नहीं, यूपी में SP-BSP अपने वोट बैंक को किसी भी सूरत में कांग्रेस की तरफ शिफ्ट नहीं होने देंगी, क्योंकि आज से 30 साल पहले SP-BSP का वोट बैंक कांग्रेस का वोट बैंक हुआ करता था. मायावती का दलित वोट बैंक और अखिलेश का यादव-मुस्लिम समीकरण. सूत्रों के मुताबिक गठबंधन की शुरुआती बातचीत में SP-BSP ने कांग्रेस को 10 सीटों का ऑफ़र किया था लेकिन कांग्रेस यूपी में 25-30 सीटें मांग रही है.

9. यूपी में कांग्रेस के साथ रहने या ना रहने से SP-BSP की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यूपी में कांग्रेस अपना जनाधार खो चुकी है. सिर्फ लोकसभा की 2 सीटें कांग्रेस के पास हैं और वो भी परिवार तक ही सीमित है. 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 7 विधानसभा सीटें जीती जो कि अनुप्रिया पटेल के अपना दल से भी कम थीं. अपना दल (एस) के 9 विधायक यूपी में जीते थे.

10. यूपी में कांग्रेस का संगठन बेहद कमज़ोर हो चुका है. SP-BSP इस बात को बख़ूबी जानती हैं कि यूपी में जो सीटें कांग्रेस को दी जाएंगी, वहीं बीजेपी के लिए लड़ाई आसान हो जाएगी. दरअसल अगर पूरे यूपी को देखा जाए तो कांग्रेस के पास 10 से ज़्यादा जिताऊ उम्मीदवार भी नहीं हैं. यूपी में 20% मुस्लिम, 21% दलित, 8% यादव, 5% कुर्मी, 11% ब्राह्मण, 6% ठाकुर, 25% ओबीसी वोट बैंक है. कांग्रेस के पास यूपी में किसी भी जाति का वोट बैंक नहीं बचा है. किसानों का विकल्प भी कांग्रेस यूपी में नहीं बन पाई है. यूपी में कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है.

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