Saturday, December 10, 2022 at 1:58 AM

यहां बंदूक लेकर छात्रों को पढाएंगे शिक्षक, जानिए क्या है वजह !

New Delhi. अमेरिकी स्कूलों में गोलीबारी की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने और छात्रों की सुरक्षा के उपाय तलाशने को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गठित आयोग ने शिक्षकों को बंदूक थमाने के साथ ही पूर्व सैनिकों को गार्ड के पद पर रखने की सिफारिश की है। आयोग ने बंदूक खरीदने की न्यूनतम आयुसीमा में वृद्धि से भी इनकार कर दिया है। उसका तर्क है कि स्कूलों में गोलीबारी करने वाले ज्यादातर छात्रों को बंदूक उनके परिजनों या दोस्तों से हासिल होती है।

फरवरी 2018 में फ्लोरिडा के मेर्जरी स्टोनमैन डगलस हाईस्कूल में एक पूर्व छात्र के 17 छात्रों को गोलियों से भूनने के बाद ट्रंप ने शिक्षामंत्री बेस्टी डावोस के नेतृत्व में ‘स्कूल सेफ्टी पैनल’ का गठन किया था। दुनिया भर को झकझोर देने वाली इस घटना को लेकर अमेरिका में बंदूक रखने की संस्कृति पर नियंत्रण के लिए बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। मंगलवार को ट्रंप को सौंपी 180 पन्नों की रिपोर्ट में आयोग ने स्कूल में तैनात विभिन्न कर्मचारियों को बंदूक से लैस करने का सुझाव दिया। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के स्कूलों को ज्यादा लाभ होगा, क्योंकि वहां पुलिस को पहुंचने में अधिक समय लग सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा है कि शिक्षा विभाग गार्ड सहित अन्य पदों पर सेना और पुलिसबल से सेवानिवृत्त होने वाले अफसरों की तैनाती कर सकता है। ये अफसर न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने में मददगार साबित होंगे, बल्कि प्रभावी शिक्षक भी बनकर उभर सकते हैं। आयोग ने गोलीबारी की घटनाओं के बाद श्वेत और लातिन अमेरिकी छात्रों से भेदभाव की शिकायतों से निपटने के लिए निलंबन व निष्काशन जैसे कठोर कदमों का विकल्प तलाशने के 2014 में दिए ओबामा प्रशासन के दिशा-निर्देशों को भी पलटने का सुझाव दिया है। उसका कहना है कि ऐसा करने से स्कूलों में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

डेमोक्रेट्स ने की आलोचना

-छात्रों की सुरक्षा के लिए स्टाफ को बंदूक थमाने की ‘स्कूल सेफ्टी पैनल’ की सिफारिश की डेमोक्रेट्स ने कड़ी आलोचना की है। पार्टी नेता नैंसी पेलोसी ने ट्विटर पर लिखा है, ‘स्कूलों में सुरक्षा पर ट्रंप की ओर से गठित पैनल की सिफारिशों का मकसद छात्रों को बचाना कम और नेशनल राइफल एसोसिएशन को लाभ पहुंचाना ज्यादा है।’

स्कूलों में गोलीबारी की बड़ी घटनाएं
-18 मई 2018 : टेक्सास के सांता फे हाईस्कूल में हुई गोलीबारी में 10 लोग मारे गए, 13 अन्य घायल हुए
-14 फरवरी 2018 : फ्लोरिडा के मेर्जरी स्टोनमैन डगलस हाईस्कूल में पूर्व छात्र की गोलीबारी में 17 मरे
-1 अक्तूबर 2015 : ओरेगॉन के उंपकुआ कम्युनिटी कॉलेज में हुई गोलीबारी में 10 लोगों की जान गई
-14 दिसंबर 2012 : कनेक्टिकट के सैंडी हुक एलिमेंटरी स्कूल के छात्र ने 28 को गोलियों से भून डाला
-16 अप्रैल 2007 : वर्जीनिया टेक स्कूल के एक छात्र ने 32 छात्रों-शिक्षकों को मौत के घाट उतार दिया

लगातार बढ़तीं वारदातें
-1990 के दशक में अमेरिकी स्कूलों में गोलीबारी की 13 घटनाएं दर्ज हुईं, इनमें 36 लोगों की जान गई
-2000 से 2018 (अप्रैल माह तक) के बीच गोलीबारी की 22 घटनाएं हुईं, इनमें कुल 66 लोग मारे गए
-77% से अधिक गोलीबारी की वारदातों में दोषी की उम्र 13 से 29 साल थी, क्लेमसन यूनिवर्सिटी के अध्ययन में दावा

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