Tuesday, November 29, 2022 at 2:56 AM

एनएचआरसी ट्रांसजेंडर के अधिकारों को लेकर किए गए एक अध्ययन में सामने आई ये बात

 भारत में 92 फीसदी ट्रांसजेंडर लोगों से राष्ट्र की आर्थिक गतिविधियों में मदद करने के अधिकारों को छीन लिया जाता है, कई बार तो ऐसा भी होता है कि योग्यता होने के बाद भी उन्हें जॉब नहीं दी जाती, ट्रांसजेंडर लोगों को भीख मांगने या फिर देहव्यापार का कार्य करने के लिए मजबूर कर दिया जाता है, यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा ट्रांसजेंडर के अधिकारों को लेकर किए गए एक अध्ययन में सामने आई है

 

एनएचआरसी की ओर से केरल की डेवलपमेंट सोसाइटी ने यह अध्ययन किया है, जिसमे में पता चला है कि ट्रांसजेंडर लोगों को अलगाव की स्थिति में अपना ज़िंदगी व्यतीत करना पड़ता है, अधिकांश स्थान उनके साथ भेदभाव होता है, हिंदुस्तान जैसे ‘लिंग विशिष्ट देश’ में इन नागरिकों को पहचान से संबंधित कठिनाई का सामना भी करना पड़ता है, पहले हर स्थान केवल दो ही लिंग के विकल्प होते थे, महिला  पुरुष, हालांकि अब दशा थोड़े सुधरे हैं  कई फार्म  अन्य स्थानों पर तीसरे लिंग (थर्ड जेंडर) का विकल्प भी रखा जाने लगा है

अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि करीब 57 फीसदी ट्रांसजेंडर सेक्स-रिअलाइटमेंट सर्जरी करना चाहते हैं लेकिन वे उसका खर्चा नहीं झेल सकते हैं, क्योंकि कम एजुकेशन सामाजिक बहिष्कार उनके रोजगार  आजीविका के अवसरों को भी कम कर देते हैं ट्रांसजेंडर लोगों में केवल 2 फीसदी ही अपने माता पिता के साथ रह पाते हैं, अध्ययन में खुलासा हुआ है कि इनमें से 52 फीसदी सहपाठियों द्वारा उत्पीड़न के शिकार होते हैं, जबकि 15 प्रतिशत के साथ अध्यापक शोषण करते हैं कई स्थान उनके साथ बलात्कार  गैंगरेप जैसी घटनाएं भी होती हैं, इसके बाद भी पुलिस में शिकायत करने पर इन्ही का शोषण किया जाता है, इन सबके बीच एक सवाल जरूर उठता है कि राष्ट्र में इन सारे मानवाधिकार संगठन होने के बाद भी क्या ट्रांसजेंडर्स को भी है मानवाधिकार ?

 

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